Noida News : चर्चाएं आम बनी अग्रवाल मित्र मंडल द्वारा सीईसी के समर्थन में दिया गया ज्ञापन, खुलकर हो रहा है विरोध
Noida News : नोएडा शहर की वैश्य समाज की एक प्रतिष्ठित सामाजिक संस्था "अग्रवाल मित्र मंडल" के बैनर तले आज नोएडा के नगर मजिस्ट्रेट को एक ज्ञापन सौंपा गया। इस ज्ञापन के माध्यम से वैश्य समाज के लोगों ने मुख्य चुनाव आयुक्त के ज्ञानेश कुमार को समर्थन दिया। उन्होंने कहा कि वह अपना कार्य ठीक से कर रहे हैं। उनके खिलाफ षडयंत्र किया जा रहा है। वही समाज के लोगों ने उन्हें सम्मानित करने की भी बात कही।
इस ज्ञापन के बाद अग्रवाल मित्र मंडल से जुड़े लोगों में आपसी गुटबंदी और विरोध शुरू हो गया है। कुछ लोगों का कहना है कि देश का युवा और विभिन्न विपक्षी पार्टियों ज्ञानेश कुमार के खिलाफ लगातार धरना प्रदर्शन कर रही हैं। उनको लेकर देश में एक भ्रम की स्थिति पैदा है। उन पर विभिन्न प्रकार के गंभीर आरोप लगाए जा रहे हैं। इसके बावजूद एक समाज के तरफ से इस तरह का ज्ञापन देना समाज की विश्वसनीयता पर भी सवालिया निशान खड़ा कर रहा है। यही कारण है कि भारी संख्या में संस्था के सदस्य, नेता ज्ञापन देने के अवसर पर नदारत दिखे।
इस संस्था के तीन हजार से ज्यादा सदस्य है। इसमें हर राजनीतिक दल समाजवादी पार्टी, बहुजन समाज पार्टी, राष्ट्रीय लोकदल, आम आदमी पार्टी, कांग्रेस, भारतीय जनता पार्टी से जुड़े हुए लोग शामिल हैं।
इस संस्था से जुड़े एक वरिष्ठ सदस्य एडवोकेट गौरव सिंघल ने बताया कि ज्यादातर लोगों का मत था कि जिस प्रकार से ज्ञानेश कुमार को लेकर विभिन्न राजनीतिक दलों द्वारा उन पर गंभीर आरोप लगाए जा रहे हैं, संस्था के बैनर तले उनके पक्ष में कोई ज्ञापन ना दिया जाए। उनका कहना था कि सिर्फ बिरादरी के होने के नाते हम हर उस व्यक्ति के पक्ष में खड़े नहीं हो सकते जो विवादित है। उनके अनुसार भाजपा के पूर्व महानगर अध्यक्ष मनोज गुप्ता ने इस मामले में अपनी मनमर्जी चलाई, और उन्होंने ज्ञापन सौंपा। इसका नतीजा यह रहा की 3 हजार से ज्यादा सदस्यों की संस्था के लोग जब ज्ञापन सौंपने पहुंचे तो वहां पर मात्र सौ से सवा सौ लोग मौजूद थे। इस बात को लेकर शहर में तरह-तरह की चर्चा है। बताया जाता है कि कुछ भाजपा नेताओं ने अपने निजी हित को साधने तथा अपने अवैध कारोबार को निरवत जारी रखने के लिए इस तरह का कदम उठाया। उन्होंने कहा कि वैश्य समाज का गौरवशाली इतिहास है। अग्रवाल मित्र मंडल नोएडा जैसी प्रतिष्ठित संस्थाएं हमेशा से समाज सेवा, जन कल्याण और सामाजिक समरसता की प्रतीक रही है, लेकिन जब ऐसी अग्रणी संस्थाएं चुनाव आयोग जैसी शिर्ष संवैधानिक संस्था के प्रमुख के समर्थन में सड़कों पर उतरती है तो इससे संस्था की मूल गैर राजनीतिक और सामाजिक छवि प्रभावित होती है।
उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की मजबूती के लिए चुनाव आयोग को हर प्रकार के प्रभाव, जातिगत गोलबंदी और राजनीतिक झुकाव से पूरी तरह ऊपर होना चाहिए। उन्होंने कहा कि हमारा विरोध किसी व्यक्ति विशेष से नहीं, बल्कि संस्थागत निष्पक्षता की रक्षा के लिए है। उन्होंने अग्रवाल मित्र मंडल के सभी पदाधिकारी और प्रबुद्ध वर्ग से अपील किया है कि न्याय, निष्पक्षता और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए समाज की अग्रणी संस्थाओं को ऐसी गतिविधियों से दूरी बनाकर रखनी चाहिए।
.वैश्य समाज से जुड़े शहर के लोग दावा कर रहे हैं कि उनकी आबादी शहर में सबसे ज्यादा है, तो क्या एक वैश्य समाज के व्यक्ति के पक्ष में ज्ञापन देने के समय मात्र इतने लोगों की उपस्थिति इस बात की की ओर इंगित नहीं करती है कि वैश्य समाज का दावा या तो निराधार है, या वैश्य समाज एकजुट नहीं है। कुछ लोगों कहना है कि जब वैश्य समाज से ताल्लुक रखने वाले दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के साथ गलत हुआ और उन्हें फर्जी तरीके से जेल भेज दिया गया, तब इस तरह के लोग कहां थे।
वैश्य समाज के एक बड़े नेता ने बताया कि इस अवसर पर तथाकथित रूप से अपने आपको वैश्य समाज का नेता कहने वाला वह व्यक्ति भी मौजूद था जो हमारे समाज से नहीं आता। वह जैन समाज से है, और अल्पसंख्यक समुदाय से आता है। उन्होंने कहा कि इस नेता पर आरोप है कि यह व्यापारियों के यहां विभिन्न सरकारी विभागों से रेड डलवाता है। तथा बिचौलिए के रूप में काम कर उनका दोहन करते हुए लाखों रुपए की कमाई करता है। कुछ दिन पूर्व तक फावड़ा- तसला किराए पर देने वाले इस नेता ने व्यापारियों का दोहन कर लाखों करोड़ों की संपत्ति अर्जित कर ली है। यह नेता खुद को व्यापारियों का नेता बताकर उनका लगातार दोहन कर रहा है।

