Noida News : मुकेश शर्मा की सक्रियता ने राजनीतिक खेमे में मचाई हलचल, सपा से चुनाव लड़ने की चर्चा
Noida News : नोएडा के सेक्टर 128 स्थित एक सोसाइटी मे रहने वाले शिक्षाविद और स्पोर्ट एकेडमी चलाने वाले बुलंदशहर निवासी मुकेश शर्मा की आजकल सामाजिक सक्रियता ने राजनीतिक खेमे में तहलका मचा दिया है। उनकी सक्रियता को लेकर समाजवादी पार्टी, बहुजन समाज पार्टी और भारतीय जनता पार्टी में खलबली मची हुई है। चर्चा है कि मुकेश शर्मा नोएडा विधानसभा सीट से सपा के टिकट पर चुनाव लड़ेंगे, लेकिन इस मामले में समाजवादी पार्टी का कोई भी बड़ा नेता या स्वयं मुकेश शर्मा की तरफ से कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया जा रहा है।
सपा सूत्रों का कहना है कि मुकेश शर्मा का टिकट लगभग तय हो गया है। अगर वह सपा के टिकट पर चुनाव लड़ते हैं तो 2027 के विधानसभा चुनाव कांटे का हो सकता है। चर्चा है कि बहुजन समाज पार्टी अपने पुराने और विश्वसनीय कार्यकर्ता जगदीश शर्मा को नोएडा विधानसभा सीट से चुनाव लड़ा सकती है। इनके भाई ओम दत्त शर्मा पूर्व में चुनाव लड़ चुके हैं। जगदीश शर्मा पूर्व में सपा से विधानसभा और लोकसभा की टिकट भी मांग रहे थे। अब चर्चा है कि वह बसपा से चुनाव लड़ सकते हैं। मुकेश शर्मा और जगदीश शर्मा दोनों ब्राह्मण समाज से आते हैं।
ब्राह्मण समाज नोएडा विधानसभा पर अच्छी खासी पकड़ रखता है। अब तक ब्राह्मण समाज का लगभग 98 प्रतिशत वोट भाजपा को एक तरफा पोल होता था। लेकिन अगर ब्राह्मण बिरादरी का कैंडिडेट समाजवादी पार्टी से चुनाव लड़ता है तो चुनाव रोचक होने की भरपूर संभावना है। अभी विगत दो दिनों में शहर मे जगह-जगह पर शिक्षाविद और गौरी शिक्षा फाउंडेशन के चेयरमैन मुकेश शर्मा का बोर्ड दिखाई दे रहा है। पिछले जन्माष्टमी पर अखबारों में भी उनकी तरफ से विज्ञापन जारी हुआ। बिगत दिनों में नोएडा के चोटपुर कॉलोनी में लोग जब बिजली की कनेक्शन कटने से अंधेरे में रहने को मजबूर हुए थे, तो वहां पर भी उनकी सक्रियता नजर आई तथा उन्होंने हजारों की संख्या में सोलर प्लेट कॉलोनी वाले लोगों को बांटा। कुछ दिन पूर्व नोएडा के सेक्टर 74 सोसाइटी में आयोजित एक कार्यक्रम में भी वह भाग लेने पहुंचे तथा बच्चों को शिक्षा और स्पोर्ट्स अकादमी में हर संभव मदद देने का आश्वासन दिया। सामाजिक सक्रियता, जगह-जगह बैनर होर्डिंग और समाचार पत्रों में विज्ञापन ने समाजवादी पार्टी से चुनाव लड़ने की ताल ठोक रहे वैश्य और गुर्जर समाज के नेताओं की भी नींद हराम कर दी है। विगत कुछ दिनों से वैश्य समाज के लोग नोएडा विधानसभा सीट पर ताल ठोक रहे थे। उनका कहना है कि नोएडा विधानसभा में मौजूदा समय में एसआईआर के बाद 5 लाख 87 हजार वोट है। चुनाव आते-आते यह 6.5 लाख हो सकता है। उनके अनुसार वैश्य समाज की वोट संख्या सबसे ज्यादा करीब 1.10 लाख है। संख्या उनके अनुसार ब्राह्मण समाज की वोट संख्या एक लाख है। खत्री पंजाबी 90 हजार, 10 हजार सिख समुदाय, 60 हजार दलित समुदाय, 50 हजार ठाकुर, 45 हजार गुर्जर, 40 हजार यादव, 55 हजार मुस्लिम , 35 हजार उत्तराखंडी, 30 हजार बंगाली और दक्षिण भारतीय आदि हैं। सबसे रोचक यह है कि नोएडा विधानसभा के कुल मत प्रतिशत का 50 प्रतिशत से ज्यादा जिनमे ब्राह्मण, दलित, मुस्लिम, यादव, ठाकुर, भूमिहार और अन्य बिरादरी है, ये पूर्वांचल और बिहार से आते हैं। इनका वोट नोएडा विधानसभा पर काफी प्रभाव डालता है। पिछले विधानसभा चुनाव में नोएडा विधानसभा पर 7,52,000 मतदाता थे। एसआईआर के बाद काफी मतदाताओं का नाम कटा है।
यक्ष प्रश्न: क्या डा. महेश शर्मा के रहते बीजेपी को छोड़ेगा ब्राह्मण
नोएडा विधानसभा चुनाव में क्या ब्राह्मण समाज भाजपा को छोड़कर उनकी बिरादरी से चुनाव लड़ने वाले अन्य पार्टियों के उम्मीदवार की तरफ जाएंगे। यह एक यक्ष प्रश्न बना हुआ है। यहा से 2014 में वैश्य समाज से विमला बाथम ने चुनाव लड़ा था, और उन्होंने पूर्व विधायक गुड्डू पंडित की पत्नी सपा प्रत्याशी श्रीमती काजल शर्मा को 60 हजार से ज्यादा वोटो से हरा दिया था। वर्ष 2017 में ठाकुर समाज के पंकज सिंह ने नोएडा विधानसभा से चुनाव लड़ा तथा बसपा के टिकट पर चुनाव लड़ रहे ब्राह्मण समाज के रवि मिश्रा को 1.6 लाख वोटों से ज्यादा से हराकर यह साबित कर दिया कि ब्राह्मण समाज बीजेपी को ही वोट करता है। वर्ष 2022 में पंकज सिंह ने बहुजन समाज पार्टी से चुनाव लड़ रहे ब्राह्मण समाज के कृपाराम शर्मा और कांग्रेस पार्टी से चुनाव लड़ रही ब्राह्मण समाज की बेटी पंखुड़ी पाठक को 1.9 लाख वोटो से हराया। श्री शर्मा और श्रीमती पाठक क्रमशः तीसरे और चौथे नंबर पर रहे थे। कृपाराम शर्मा तब सार्वजनिक रूप से आलोचना करते हुए कहा था कि ब्राह्मण समाज के लिए कुछ भी कर दो वे वोट बीजेपी को ही देंगे। नोएडा के चाणक्य कहे जाने वाले एक राजनीतिक विशेषज्ञ का कहना है कि जब तक डॉक्टर महेश शर्मा भाजपा से जुड़े रहेंगे, तब तक ब्राह्मण समाज किसी अन्य पार्टी के उम्मीदवार को वोट नहीं करेगा।

