Ghaziabad News : एनसीआर के चार बड़े बिल्डरों सहित 20 पर मुकदमा दर्ज

Jul 29, 2026 - 19:48
Ghaziabad News : एनसीआर के चार बड़े बिल्डरों सहित 20 पर  मुकदमा दर्ज
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Ghaziabad News : फर्जी दस्तावेज बनाकर एक बिल्डर कंपनी के अन्य निदेशकों द्वारा करीब 39,842 वर्ग मीटर जमीन को नई कंपनी बनाकर अपने परिजनों को कंपनी में निदेशक व शेयर होल्डर बनाकर 400 करोड रुपए के कीमत की जमीन को एक करोड़ रुपए भुगतान कर विक्रय करने के मामले में एनसीआर के प्रसिद्ध बिल्डर मनोज गौड़ ने चार बड़े बिल्डरों और उनके परिजनों सहित 20 लोगों के खिलाफ थाना रिपब्लिक क्रॉसिंग में मुकदमा दर्ज करवाया है।  

पुलिस उपायुक्त नगर धवल जायसवाल ने बताया कि गौड़ ग्रुप के डायरेक्टर मनोज गौड़ ने थाना रिपब्लिक क्रॉसिंग में आज रिपोर्ट रिपोर्ट दर्ज कराई है कि क्रॉसिंग इंफ्रास्ट्रक्चर एक प्राइवेट लिमिटेड कंपनी है, जो 30 मार्च 2005 से रजिस्टर्ड है और रियल एस्टेट का काम करती है। कंपनी इंटीग्रेटेड अर्बन टाउनशिप के लिए बनाई गई। इसके लिए जीडीए से 29 मार्च 2006 में लाइसेंस लिया गया। इसमें 360 एकड़ क्षेत्र डूंडाहेड़ा, अकबरपुर, बहरामपुर में स्थित है। इस पर क्रॉसिंग रिपब्लिक का निर्माण कराया गया। वर्तमान में क्रॉसिंग इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी में वह और संजीव श्रीवास्तव कार्यकारी निदेशक हैं। वहीं, अशोक चौधरी, अशोक गुप्ता, विशेष गौड़, विशाल शर्मा तथा निषभा भास्कर कंपनी में निदेशक हैं। क्रॉसिंग कंपनी में गौड़ ग्रुप की कंपनियों के 64.13 प्रतिशत शेयर हैं। अन्य सभी का शेयर 35.87 प्रतिशत है। कंपनी नियमों के तहत किसी भी संपत्ति का क्रय या विक्रय निदेशक मंडल की मीटिंग बुलाकर प्रस्ताव पास कराने के बाद ही किया जा सकता है, लेकिन इस मामले में संजीव श्रीवास्तव, अशोक कुमार गुप्ता, अशोक चौधरी ने साठगांठ कर षड्यंत्र रचा और चार फर्जी कंपनी ग्राउंड ऐरा वेंचर्स प्राइवेट लिमिटेड, रियल एपीए वेंचर्स प्राइवेट लिमिटेड, कोसएपीए वेंचर्स प्राइवेट लिमिटेड और गृहलाभ वेंचर्स प्राइवेट लिमिटेड का 8 अप्रैल 2026 को गठन किया गया। इनके द्वारा इन कंपनियों में अपने परिवार के लोगों और परिचितों को शामिल किया गया।

मनोज गौड़ के अनुसार, दिव्या अरोड़ा प्रोविव्यू कंस्ट्रक्शन के निदेशक राजीव अरोड़ा के परिवार से हैं। प्रिया श्रीवास्तव, अचलानंद, चन्द्र किशोर सिंह एसोटैक लिमिटेड के निदेशक संजीव श्रीवास्तव से संबंधित हैं। मयंक गुप्ता, मेहुल गुप्ता, निखिल गुप्ता, अजनारा इंडिया लिमिटेड के निदेशक अशोक गुप्ता के परिवार से हैं। वहीं, राहुल कुमार वैन्यूऐंट इंफ्रा डेवलपर के निदेशक अशोक चौधरी का पुत्र है। ये सभी इन कंपनियों के शेयर होल्डर हैं। आरोप है कि इनके द्वारा 13 मई 2026 को इन चार फर्जी कंपनियों के नाम पर चार अलग-अलग कूटरचित विक्रय पत्र तैयार कर बैनामा कर दिया गया। इस जमीन का बाजार मूल्य चार सौ करोड़ से अधिक है। विक्रय मूल्य 97 करोड़ रुपये के स्थान पर केवल एक करोड़ का भुगतान दिखाकर चारों बैनामों के माध्यम से किया गया। इन बैनामों में अशोक कुमार चौधरी, संजीव श्रीवास्तव, अशोक गुप्ता और राजीव अरोड़ा गवाह बने। पूर्ण भुगतान किए बिना ही फर्जी बैनामा करा लिया गया। क्रय-विक्रय के लिए बोर्ड से कोई प्रस्ताव भी मंजूर नहीं कराया गया। आरोप है कि इन लोगों ने पारस गुप्ता एसोसिएट्स कंपनी सेक्रेटरी को भी साथ मिलाया और चार सौ करोड़ की धोखाधड़ी की। आरोप है कि जिन लोगों से बैनामे कराए गए, उन्हें इसका कोई अधिकार नहीं है।

वही एसोटेक ग्रुप के संजीव श्रीवास्तव और अजनारा ग्रुप के अशोक कुमार गुप्ता ने कहा कि यह मुकदमा और उनके ऊपर लगे आरोप दोनों गलत हैं। इस मामले में वह स्वयं पीड़ित हैं। उन्होंने मनोज गौड़ और उनकी कंपनी पर आरोप लगाए कि उन्होंने कुछ शेयरधारकों के साथ मिलकर धोखाधड़ी से सुपरटेक और महागुन के शेयर अपनी कंपनियों को ट्रांसफर किए।

उन्होंने पैरामाउंट के मालिक मुकेश अग्रवाल के परिवार पर भी शेयर बेचने का दबाव डाला। उन्होंने कंपनी में घुसकर मारपीट करने और कंपनी से संबंधित रिकॉर्ड और अन्य कागजातों को भी 18 मई को जबरन ले जाने का आरोप मनोज गौड़ पर लगाया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि निदेशकों की सहमति के बिना कंपनी के स्कूल प्लॉट को कम कीमत पर रिश्तेदारों को बेचने की साजिश रची गई।

शेयरधारकों के समझौते का उल्लंघन करते हुए, बिना लिखित सहमति के अन्य शेयरधारकों की कीमती जमीन को प्राइम लोकेशन पर इकट्ठा भी कर लिया। कंपनी की संपत्ति को बचाने के लिए निदेशकों अशोक चौधरी, अशोक कुमार गुप्ता, संजीव श्रीवास्तव और राजीव अरोड़ा ने मिलकर जमीन को एक सहयोगी कंपनी के नाम रजिस्टर कराने का फैसला किया। पूरी स्टाम्प ड्यूटी का भुगतान किया गया और बिक्री से मिली रकम क्रॉसिंग्स बैंक में जमा की गई। इसके अधिकृत हस्ताक्षरकर्ता मनोज गौड़ ही हैं।