Greater Noida News : पीएमईजीपी योजना के तहत लोन दिलवाने के नाम पर ठगी करने वाले छह गिरफ्तार

May 14, 2026 - 18:31
Greater Noida News : पीएमईजीपी योजना के तहत लोन दिलवाने के नाम पर ठगी करने वाले छह गिरफ्तार
पीएमईजीपी योजना के तहत लोन दिलवाने के नाम पर ठगी करने वाले छह गिरफ्तार

Greater Noida News : थाना बिसरख पुलिस और साइबर सेल ने पीएमईजीपी योजना के तहत सब्सिडी लोन दिलाने का झांसा देकर करोड़ों की ठगी करने वाले अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश किया है। छह आरोपियों को गिरफ्तार कर मोबाइल फोन और कॉलिंग डाटा बरामद किया गया।

पुलिस उपायुक्त जोन द्वितीय शैलेंद्र कुमार सिंह ने बताया कि प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (पीएमईजीपी) के तहत सब्सिडी लोन दिलाने का झांसा देकर देशभर के लोगों से करोड़ों रुपये की ठगी करने वाले अंतरराज्यीय साइबर गिरोह का थाना बिसरख पुलिस और साइबर सेल ने आज पर्दाफाश किया है। संयुक्त कार्रवाई करते हुए पुलिस ने गिरोह के छह सदस्यों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों के कब्जे से 18 की-पैड मोबाइल फोन, छह स्मार्ट फोन और 15 रजिस्टर, कॉलिंग डाटा बरामद किए गए हैं। आरोपी सोशल मीडिया पर फर्जी विज्ञापन चलाकर बेरोजगार युवाओं और लोन की तलाश कर रहे लोगों को अपने जाल में फंसाते थे।

डीसीपी ने बताया कि कार्रवाई के दौरान कृष्णा काउंटी टॉवर-ए, सेक्टर-1 की छत से छह आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान धर्मराज राठौर, रवि कुमार, किशन राठौर, अक्षय, किरण नायर और किरण बाबू राठौर के रूप में हुई है। सभी आरोपी मूल रूप से कर्नाटक के बीजापुर और विजयपुर क्षेत्र के रहने वाले हैं तथा ग्रेटर नोएडा में रहकर साइबर ठगी का नेटवर्क संचालित कर रहे थे। पुलिस पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि वे इंस्टाग्राम, फेसबुक समेत अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर आधार कार्ड और पैन कार्ड से संबंधित आकर्षक विज्ञापन चलाते थे। विज्ञापन इस तरह तैयार किए जाते थे कि बेरोजगार युवक, छोटे कारोबारी और लोन की जरूरत वाले लोग आसानी से प्रभावित हो जाएं। जैसे ही कोई व्यक्ति विज्ञापन पर क्लिक करता था, उसके सामने आरोपियों का मोबाइल नंबर दिखाई देता था। इसके बाद गिरोह के सदस्य खुद को सरकारी योजना से जुड़े अधिकृत लोन अधिकारी बताकर बातचीत शुरू करते थे। 

आरोपी लोगों को बताते थे कि प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम के तहत उन्हें सब्सिडी आधारित होम लोन या व्यवसायिक लोन बेहद कम ब्याज दर पर दिलाया जाएगा। विश्वास जीतने के लिए आरोपी सरकारी योजनाओं और बैंकिंग प्रक्रिया से जुड़ी तकनीकी भाषा का इस्तेमाल करते थे। इसके बाद फाइल चार्ज, प्रोसेसिंग फीस, बीमा, एनओसी, जीएसटी और अन्य औपचारिकताओं के नाम पर लोगों से अलग-अलग बैंक खातों में रकम जमा कराई जाती थी। आरोपी प्रति व्यक्ति दो लाख से चार लाख रुपये तक की रकम वसूलते थे। रकम जमा होने के बाद आरोपी मोबाइल नंबर बंद कर देते थे या पीड़ितों को अलग-अलग बहाने देकर टालते रहते थे। इस प्रकार गिरोह ने देशभर के अनेक लोगों को निशाना बनाकर करोड़ों रुपये की ठगी की है। पुलिस अब विभिन्न बैंक खातों और मोबाइल नंबरों की जांच कर यह पता लगाने में जुटी है कि अब तक कितने लोग गिरोह का शिकार बने हैं। साइबर अपराध से बचने के लिए गिरोह बेहद शातिर तरीके अपनाता था। आरोपी अधिकतर की-पैड मोबाइल फोन का उपयोग करते थे ताकि उनकी डिजिटल ट्रैकिंग कम हो सके। इसके अलावा वह लगातार सिम कार्ड बदलते रहते थे। जिससे पुलिस के लिए उनकी लोकेशन ट्रेस करना कठिन हो जाता था।