Noida News : नोएडा में पुलिस कमिश्नर लक्ष्मी सिंह को एमिटी एक्सलेंस अवार्ड से किया सम्मानित
Noida News : नोएडा के सेक्टर-125 स्थित एमिटी विश्वविद्यालय के एमिटी इंटरनेशनल बिजनेस स्कूल द्वारा आयोजित त्रिदिवसीय 26वें अंर्तराष्ट्रीय बिजनेस क्षितिज ‘‘इनबुश विश्व सम्मेलन 2026’’ के अंर्तगत गुरुवार को महिला नेतृत्व एवं कल्याण पर कार्यक्रम आयोजन किया गया।
इस सत्र में गौतमबुद्धनगर की पुलिस कमिश्नर लक्ष्मी सिंह, एमिटी हयुमिनिटी फांउडेशन की चेयरपरसन डा. पूजा चौहान, द अर्थशास्त्र ग्रुप की संस्थापक शुभ्रस्था, उच्चतम न्यायालय की वरिष्ठ अधिवक्ता डा. पिंकी आनंद, बोइंग 787 की वरिष्ठ कमांडर अर्चना कपूर, एमिटी ग्रुप वाइस चांसलर डा. गुरिंदर सिंह ने अपने विचार रखे।
इस अवसर पर पुलिस कमिश्नर लक्ष्मी सिंह को एमिटी हयुमिनिटी फांउडेशन की चेयरपरसन डा. पूजा चौहान द्वारा एमिटी एक्सलेंस अवार्ड फॉर पब्लिक सेफ्टी एंड गर्वनेंस से सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम के दौरान पुलिस कमिश्नर लक्ष्मी सिंह ने कहा कि यह सच है कि राष्ट्रीय बल्कि स्थानीय बैंकों में खाता धारक महिलाएं है और पिछले दस वर्षों में वित्तीय क्रांति ने उन्हें सशक्त किया है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश एक मात्र राज्य है जहां बैंक सखी है, जो ग्रामीण क्षेत्रों में घर-घर बैंकिंग सुविधा पहुंचाने और महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए कार्य करती है। वित्तीय साक्षरता क्रांति के साथ शिक्षा कार्यक्रम भी बड़े पैमाने पर संचालित हो रहे है। उन्होंने कहा कि अगर हम केवल समानता की बात करेगें तो भटक जायेंगे, क्योंकि आप केवल यह देखेंगे आपके समकक्ष जो है वो क्या कर रहा है तो निजी विकास रूक जायेगा। आपके पास अपनी क्षमता को देखने का समय नहीं होगा। आप समाज की बनाई गई मॉडयूल में स्वयं को फिट करने में लग जायेंगे और आपकी उड़ान थम जायेगी। उन्होंने कहा कि केवल गेहूं और धान को उगाने से देश आगे नहीं बढ़ेगा बल्कि महिलाओं के योगदान को पहचान देने से आगे बढ़ेगा। जब आप स्वयं के प्रति सम्मान रखेंगे और अपने कार्य के प्रति पूर्ण समर्पित रहेगें तो समानता अपने आप आयेगी।
वहीं उच्चतम न्यायालय की वरिष्ठ अधिवक्ता डा पिंकी आनंद ने कहा कि महिलाओं के लिए दो सबसे महत्वपूर्ण है। प्रथम उपलब्धता या पहुंच , हम जो हासिल कर सकते है उसे पाने की पहुंच हो। द्वितीय आपको स्थान या अवधि प्राप्त हो। महिला इस कार्य को कैसे कर सकती है या पुरूषों से बेहतर कैसे कर सकती है या बहस का मुद्दा नहीं है बल्कि मैं इस वैश्विक युग में अपने कार्य से क्या सहयोग देता हूं यह आवश्यक है।

