Noida News : यूपी की अर्थव्यवस्था का गेमचेंजर होगा जेवर एयरपोर्ट, कृषि से उद्योग तक दिखेगा व्यापक असर

Mar 28, 2026 - 14:49
Noida News : यूपी की अर्थव्यवस्था का गेमचेंजर होगा जेवर एयरपोर्ट, कृषि से उद्योग तक दिखेगा व्यापक असर

Noida News : भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज जेवर इंटरनेशनल एयरपोर्ट का विधिवत उद्घाटन किया। करीब साढे चार वर्ष पूर्व उन्होंने इसका शिलान्यास किया था। यह उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था के लिए एक निर्णायक मोड़ साबित होने जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा इसके शुभारंभ के साथ ही यह मेगा प्रोजेक्ट केवल एक एयरपोर्ट नहीं, बल्कि प्रदेश को 1 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने की दिशा में एक मजबूत स्ट्रैटेजिक इंजन के रूप में सामने आएगा।

 

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विजन के अनुरूप विकसित यह एयरपोर्ट उत्तर प्रदेश के लंबे समय से “लैंड-लॉक्ड” आर्थिक पोटेंशियल को अनलॉक करेगा और कृषि, एमएसएमई, लॉजिस्टिक्स, पर्यटन व उद्योगों को सीधे वैश्विक बाजार से जोड़ेगा। बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन, निवेश आकर्षण और मल्टी-मोडल कनेक्टिविटी के चलते यह परियोजना न केवल उत्तर प्रदेश की जीडीपी को नई गति देगी, बल्कि उत्तर प्रदेश को राष्ट्रीय ही नहीं, वैश्विक आर्थिक मानचित्र पर एक मजबूत पहचान भी दिलाएगी।

यमुना विकास प्राधिकरण के पूर्व मुख्य कार्यपालक अधिकारी और नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के निर्माण में अहम भूमिका निभाने वाले रिटायर्ड आईएएस अधिकारी डॉक्टर अरुणवीर सिंह ने बताया कि भारत का सबसे बड़ा ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट बनने जा रहा यह प्रोजेक्ट 7 करोड़ यात्रियों की वार्षिक क्षमता और लगभग 10 लाख टन कार्गो हैंडलिंग के साथ कृषि, एमएसएमई और लॉजिस्टिक्स सेक्टर को नई गति देगा। इसके जरिए फल, सब्जी, डेयरी और सजावटी फूल जैसे पेरिशेबल उत्पाद सीधे अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचेंगे, जिससे “फार्म-टू-ग्लोबल मार्केट” मॉडल मजबूत होगा और किसानों की आय में 20–30 प्रतिशत तक वृद्धि की संभावना है। साथ ही, लॉजिस्टिक्स लागत घटने, निर्यात बढ़ने और वैश्विक कनेक्टिविटी बेहतर होने से उत्तर प्रदेश को राष्ट्रीय ही नहीं, बल्कि अंतर्राष्ट्रीय आर्थिक मानचित्र पर एक सशक्त पहचान मिलेगी।

उन्होंने कहा कि नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट उत्तर प्रदेश में व्यापार और पर्यटन के नए आयाम स्थापित करने जा रहा है। यह एयरपोर्ट दिल्ली-एनसीआर, आगरा, मथुरा, वृंदावन और वाराणसी जैसे प्रमुख धार्मिक शहरों को एक वैश्विक पर्यटन सर्किट से जुड़ेगा, जिससे अंतर्राष्ट्रीय पर्यटकों की आवाजाही में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। बेहतर कनेक्टिविटी के चलते धार्मिक पर्यटन, मेडिकल टूरिज्म और बिजनेस ट्रैवल को भी नई गति मिलेगी। जब यह एयरपोर्ट अपने पूर्ण क्षमता के साथ संचालित होगा, तो इसके व्यापक आर्थिक प्रभाव से उत्तर प्रदेश की जीडीपी में एक प्रतिशत से अधिक की वृद्धि संभव है, जो प्रदेश की अर्थव्यवस्था को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाएगा।

उन्होंने कहा कि नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट केवल परिवहन सुविधा तक सीमित नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश में बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन का प्रमुख इंजन बनने जा रहा है। उनके अनुसार, शुरुआती 5 वर्षों में एयरपोर्ट ऑपरेशन, ग्राउंड हैंडलिंग, सिक्योरिटी, रिटेल और हॉस्पिटैलिटी जैसे क्षेत्रों में 20,000 से अधिक तथा एमआरओ, कार्गो, लॉजिस्टिक्स और एविएशन सर्विसेज में 30,000 से अधिक, कुल मिलाकर 50,000 से अधिक प्रत्यक्ष रोजगार सृजित होंगे। उन्होंने कहा कि कृषि, ट्रांसपोर्ट, सप्लाई चेन, एमएसएमई, होटल और पर्यटन जैसे सेक्टर्स में 5 लाख से अधिक अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा होंगे, जो लंबी अवधि में 40–50 लाख तक पहुंच सकते हैं। प्रदेश में मौजूद लगभग एक करोड़ एमएसएमई को वैश्विक बाजार से जोड़कर यह एयरपोर्ट न केवल रोजगार बढ़ाएगा, बल्कि आर्थिक गतिविधियों को भी व्यापक स्तर पर गति देगा।

उन्होंने कहा कि जेवर एयरपोर्ट के विकास के साथ उत्तर प्रदेश में रियल एस्टेट और औद्योगिक परिदृश्य में व्यापक बदलाव देखने को मिलेगा। नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना एक्सप्रेसवे इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट अथॉरिटी (यीडा) तेजी से एक प्रीमियम निवेश और औद्योगिक केंद्र के रूप में उभरेंगे, वहीं बुलंदशहर, अलीगढ़ और मथुरा-वृंदावन तक अर्बन एक्सपेंशन कॉरिडोर विकसित होकर नए शहरों और टाउनशिप को जन्म देगा। एयरपोर्ट के आसपास होटल, वेयरहाउस, ऑफिस स्पेस, लॉजिस्टिक्स पार्क और डेटा सेंटर में बड़े निवेश आकर्षित होंगे, जिससे रोजगार और व्यावसायिक गतिविधियां बढ़ेंगी। इसके साथ ही इलेक्ट्रॉनिक्स, मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग, फूड प्रोसेसिंग और टेक्सटाइल जैसे निर्यात-उन्मुख उद्योगों को नई गति मिलेगी, जो इस क्षेत्र को एक मजबूत इंडस्ट्रियल और एक्सपोर्ट हब के रूप में स्थापित करेगा।

एयरपोर्ट के संचालन से उत्तर प्रदेश के औद्योगिक क्षेत्र को उल्लेखनीय गति मिलने की उम्मीद है। बेहतर कनेक्टिविटी और कम लॉजिस्टिक्स लागत के चलते इलेक्ट्रॉनिक्स, मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग, फूड प्रोसेसिंग और टेक्सटाइल जैसे प्रमुख सेक्टर तेजी से विकसित होंगे। खासकर निर्यात उन्मुख उद्योगों को वैश्विक बाजार तक सीधी पहुंच मिलेगी, जिससे उत्पादन और निवेश दोनों में वृद्धि होगी। यह एयरपोर्ट इंडस्ट्री के लिए एक मजबूत सप्लाई चेन नेटवर्क तैयार करेगा, जो उत्तर प्रदेश को देश के प्रमुख मैन्युफैक्चरिंग और एक्सपोर्ट हब के रूप में स्थापित करने में अहम भूमिका 

उन्होंने कहा कि जेवर एयरपोर्ट को केवल दिल्ली-एनसीआर के सहायक एयरपोर्ट के रूप में नहीं, बल्कि भविष्य के एक बड़े मल्टी-मोडल इंटरनेशनल एविएशन हब के रूप में विकसित किया जा रहा है। यह दिल्ली के आईजीआई एयरपोर्ट पर बढ़ते दबाव को कम करते हुए एयर ट्रैफिक को संतुलित करेगा। 5 रनवे की प्रस्तावित क्षमता के साथ यह देश का सबसे बड़ा एविएशन हब बनने की दिशा में अग्रसर है। इसकी रणनीतिक स्थिति इसे एशिया और यूरोप के बीच एक अहम ट्रांजिट केंद्र बना सकती है, जिससे अंतरराष्ट्रीय कनेक्टिविटी में बड़ा विस्तार होगा। साथ ही, बदलते वैश्विक हालात के बीच यह दुबई, दोहा और अबु धाबी जैसे स्थापित हब के विकल्प के रूप में उभरकर भारत की एविएशन क्षमता को नई ऊंचाई देने की क्षमता रखता है।

उन्होंने बताया कि नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट की रणनीतिक लोकेशन इसे एमएसएमई, लॉजिस्टिक्स और वेयरहाउसिंग सेक्टर के लिए गेमचेंजर बनाती है। ईस्टर्न और वेस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर के करीब होने के साथ-साथ यमुना एक्सप्रेसवे, दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे और अन्य प्रमुख हाईवे से इसकी मल्टी-मोडल कनेक्टिविटी इस क्षेत्र को देश का सबसे बड़ा लॉजिस्टिक हब बना सकती है। इसके परिणामस्वरूप वेयरहाउसिंग, कोल्ड स्टोरेज और ई-कॉमर्स फुलफिलमेंट सेंटर में तेजी से विस्तार होगा, जिससे सप्लाई चेन अधिक कुशल बनेगी। साथ ही, भारत में 13–14 प्रतिशत तक रहने वाली लॉजिस्टिक लागत में कमी आने से एमएसएमई सेक्टर की प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ेगी और निर्यात को नई गति मिलेगी।

उन्होंने कहा कि नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के आसपास विकसित हो रही एयरोसिटी, लॉजिस्टिक्स पार्क और इंडस्ट्रियल क्लस्टर उत्तर प्रदेश को निवेश का नया केंद्र बना रहे हैं। राज्य सरकार की एफडीआई-फ्रेंडली नीतियों और बेहतर “ईज ऑफ डूइंग बिजनेस” माहौल के चलते घरेलू और विदेशी निवेशकों का रुझान तेजी से बढ़ेगा। बेहतर कनेक्टिविटी और कम होती लॉजिस्टिक्स लागत के कारण उत्पादन लागत में कमी आएगी, जिससे उद्योगों की प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ेगी। खासकर इलेक्ट्रॉनिक्स, सेमीकंडक्टर और डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग जैसे उभरते सेक्टर्स में बड़े निवेश की संभावनाएं हैं।