Greater Noida News : ऑनलाइन गेमिंग और गैंबलिंग के नाम पर ठगी करने वाले आठ गिरफ्तार
Greater Noida News : थाना बिसरख पुलिस ने ऑनलाइन गेमिंग और ऑनलाइन गैंबलिंग के नाम पर लोगों से ठगी करने वाले कॉल सेंटर का पर्दाफाश करते हुए आज आठ आरोपियों को गिरफ्तार किया है। गिरोह में तीन पुरुष और पांच महिला शामिल हैं। गिरोह मजाबुक और मजे से जीतो नामक ऑनलाइन गेमिंग ऐप, वेबसाइट के माध्यम से लोगों को जुए और सट्टे जैसी गतिविधियों में शामिल करता था। गिरोह पिछले छह माह में हजारों लोगों से करीब एक करोड़ रुपये से अधिक की ठगी कर चुका हैं। गिरफ्तार किए गए आरोपियों में गर्व चौहान (21), अजय सिंह (28) सोनल उर्फ अनिरुद्ध (32) शामिल हैं। जबकि महिला आरोपियों में फिरोजाबाद की रहने वाली रुचि (20), कानपुर की कोमल सिंह (20), सुषमा रावत (21), गाजियाबाद की तनीषा मित्तल (20) और प्रतापगढ़ की निवासी सानिया सिंह शामिल हैं। गिरोह जबलपुर के ओमी नामक व्यक्ति के इशारे पर काम करता था। पुलिस उसकी तलाश कर रही है।
DCP Central Noida : डीसीपी सेंट्रल नोएडा शक्ति मोहन अवस्थी ने बताया कि पुलिस को गोपनीय सूत्रों से सूचना प्राप्त हुई थी कि गौड़ सिटी सेंटर क्षेत्र में एक गिरोह ऑनलाइन गेमिंग एप के जरिए लोगों को मोटा मुनाफा कमाने का झांसा देकर ठगी कर रहा है। सूचना के आधार पर बृहस्पतिवार को पुलिस टीम ने गौड़ सिटी सेंटर के चार मूर्ति चौराहा के निकट स्थित चौथी मंजिल से गिरोह के आठ सदस्यों को रंगे हाथों गिरफ्तार किया। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से 18 एंड्रॉयड मोबाइल फोन, चार लैपटॉप, 155 प्रयोगशुदा विभिन्न मोबाइल कंपनियों के फर्जी सिम कार्ड, 50 भुगतान क्यूआर कोड, दो कंप्यूटर मॉनिटर, चार वाई-फाई मॉडम, 10 पेज की डाटा शीट, 10 कॉलिंग हेडफोन और 45 हजार रुपये नकद बरामद किए हैं।
Police Station Bisrakh Greater Noida News : उन्होंने बताया कि आरोपी ऑनलाइन गेमिंग प्लेटफॉर्म के माध्यम से क्रिकेट, कसीनो, एविएटर, रूलेट और नंबरिंग गेम जैसे खेल खिलवाते थे। शुरुआत में ग्राहकों को छोटी-छोटी रकम जितवाकर उनका भरोसा और लालच बढ़ाया जाता था। जैसे ही ग्राहक अधिक धनराशि लगाने लगता, खेल का नियंत्रण अपने हाथ में लेकर उसे लगातार हरवाया जाता और उसकी जमा पूंजी डुबो दी जाती थी। यदि कोई ग्राहक जीतकर रकम निकालने की बात करता तो उसे तकनीकी बहानों से टाल दिया जाता था। डीसीपी का कहना है कि पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि गेम का पूरा कंट्रोल उनके पास होता था और आरोपी तय करते थे कि कौन जीतेगा और कौन हारेगा। गिरोह के सदस्य पहले पीड़ितों को 1500 रुपये तक का फ्री बोनस देकर गेम खेलने के लिए प्रेरित करते थे, जिसे निकाला नहीं जा सकता था। इसके बाद रजिस्ट्रेशन के नाम पर 500 रुपये मांगे जाते थे। गिरोह में शामिल युवतियों को ग्राहकों को फोन करने के लिए रखा गया था। जिससे लोग जल्दी भरोसा करते थे। इन्हें बकायदा वेतन दिया जाता था। फोन करने वाली युवतियों को मालूम होता था कि वह ग्राहकों से ठगी करती हैं। गिरोह गरीब लोगों को लालच देकर उनका आधार कार्ड और जरूरी दस्तावेज लेक फर्जी पहचान पत्रों के आधार पर सिम कार्ड खरीदता था। उन्हीं सिम कार्डों पर अलग-अलग बैंकों में खाते खुलवाए जाते थे। ग्राहकों से पैसे इन्हीं खातों और क्यूआर कोड के माध्यम से ट्रांसफर कराए जाते थे।
उन्होंने बताया कि आरोपी फर्जी केवाईसी दस्तावेज तैयार करते थे। अपनी ही फोटो लगाकर वह ऐसे दस्तावेज बनाते थे। जिससे सिम कार्ड और बैंक खातों को वैध दिखाया जा सके। कॉलिंग के लिए इस्तेमाल की जाने वाली सिम फर्जी आईडी पर खरीदी जाती थीं, जिससे पुलिस या अन्य एजेंसियों की पकड़ में न आ सकें।

