Noida News : पत्नी की हत्या के आरोप में पति को उम्रकैद

Sep 22, 2026 - 19:58
Noida News :  पत्नी की हत्या के आरोप में पति को उम्रकैद
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Noida News : अपर सत्र न्यायाधीश सोमप्रभा मिश्रा की अदालत ने पत्नी की निर्मम हत्या के मामले में पति को दोषी करार देते हुए आज उम्रकैद और पचास हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई है। अदालत ने बुलंदशहर निवासी अब्दुल खालिद पर 50 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। जुर्माना जमा नहीं करने पर दोषी को छह माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।

पुलिस आयुक्त श्रीमती लक्ष्मी सिंह के मीडिया प्रभारी ने बताया कि मामला 2 फरवरी 2022 का है। जब वादिनी आशा देवी ने थाना सेक्टर-113 नोएडा पर तहरीर देकर बताया था कि उनकी बहन आशमीन की शादी वर्ष 2012 में खालिद के साथ हुई थी। दोनों सेक्टर-73 स्थित महादेव अपार्टमेंट में रह रहे थे। खालिद शुरू से ही आशमीन को परेशान करता था और दोनों के बीच अक्सर झगड़ा होता रहता था। घटना से करीब 15-20 दिन पहले आशमीन जयपुर गई हुई थी। 30 जनवरी 2022 को दोनों के बीच फोन पर भी झगड़ा हुआ था। जिसके बाद आशमीन उसी रात जयपुर से नोएडा के लिए बस से रवाना हुई और 31 जनवरी की सुबह अपने पति के पास वापस आ गई। 31 जनवरी की सुबह करीब 6 बजे आशमीन ने अपनी बहन आशा देवी को फोन किया था, लेकिन उस वक्त वह सो रही थीं। बाद में जब कॉल किया गया तो फोन स्विच ऑफ मिला, जिससे परिवार को कुछ अनहोनी की आशंका हुई। हालांकि उस दिन आशा देवी अपने बेटे के जन्मदिन में व्यस्त होने के कारण इस पर तुरंत ध्यान नहीं दे सकीं।

एक फरवरी 2022 की रात करीब 9 बजे जब आशा देवी अपने पति खलक सिंह और बहन शालू के साथ आशमीन के फ्लैट पर पहुंचीं, तो दरवाजे पर बाहर से ताला लगा हुआ मिला। परिवार की सूचना पर मौके पर पहुंची पुलिस ने ताला तुड़वाकर देखा तो कमरे में आशमीन का शव जमीन पर रजाई में लिपटा पड़ा था और सिर से काफी खून बह रहा था। इसी के आधार पर थाने में मुकदमा दर्ज किया गया था। एडीजीसी अपराध ह्रदेश रावल का कहना है कि अभियोजन पक्ष की ओर से नौ गवाहों पेश किए गए। गवाहों ने एक स्वर में बताया कि आशमीन व खालिद के बीच शुरू से ही विवाद रहता था और घटना से पहले भी फोन पर झगड़ा हुआ था। आरोपी की निशानदेही पर कंक्रीट का एक टुकड़ा बरामद किया गया, जिस पर फोरेंसिक जांच में मानव रक्त पाया गया। फैसले में अदालत ने कहा कि इस मामले में घटना का कोई प्रत्यक्षदर्शी गवाह नहीं था। बल्कि पूरा मामला परिस्थितिजन्य साक्ष्य पर आधारित था। बचाव पक्ष ने यह तर्क भी दिया था कि मृतका के भाई-बहनों ने संपत्ति (प्लॉट) हड़पने के लालच में झूठा फंसाया है, लेकिन अदालत ने इसे आधारहीन करार दिया और कहा कि इस्लामी विधि के अनुसार मृतका की संपत्ति पर स्वामित्व व उत्तराधिकार उसके पति व बच्चों को ही प्राप्त होगा, इसलिए यह तर्क तर्कसंगत नहीं ठहरता। अदालत ने अपराध की गंभीरता को देखते हुए आरोपी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई।