Noida News : अखलाक माॅब लिंचिंग केस में यूपी सरकार को झटका, कोर्ट ने खारिज की केस वापस लेने वाली याचिका
Noida News : थाना जारचा क्षेत्र के बिसाहाड़ा गांव के चर्चित अखलाक मॉब लिंचिंग मामले में जनपद गौतमबुद्ध नगर की कोर्ट ने मंगलवार को आरोपियों के खिलाफ केस वापस लेने की राज्य सरकार की अपील को खारिज कर दिया है। इस अपील के जरिए उत्तर प्रदेश सरकार ने केस वापस लेने की इजाजत मांगी थी। जिला अदालत के इस फैसले से उत्तर प्रदेश सरकार को बड़ा झटका लगा है।सुनवाई के दौरान अदालत ने यूपी सरकार की दलीलों को अपर्याप्त और आधारहीन करार दिया। अदालत ने कहा कि केस वापस लेने का कोई ठोस कानूनी आधार नहीं है।
बता दें कि 10 साल पूर्व गौतम बुद्ध नगर जनपद के थाना जारचा क्षेत्र के बिसाहड़ा गांव में एक अफवाह के तहत भीड़ ने 50 साल के मोहम्मद अखलाक को कथित तौर पर पीट-पीटकर मार डाला था। भीड़ का आरोप था कि अखलाक के परिवार ने बछड़े की हत्या कर उसका मांस खाया है। भीड़ का यह भी कहना था कि अखलाक ने घर में गोमांस रखा है।
इसके बाद गांव के लोगों ने पीट-पीटकर अखलाक की हत्या कर दी थी। 28 सितंबर 2015 को हुई इस घटना की चर्चा देशभर में हुई थी। इस घटना की जमकर आलोचना हुई थी। पुलिस ने जांच के बाद कुल 19 लोगों को इस मामले में आरोपी बनाया था। सभी पर हत्या, दंगा भड़काने और जान से मारने की धमकी देने जैसी गंभीर धाराओं में केस दर्ज किया गया था।
कानूनी लड़ाई के बीच अक्टूबर 2025 में उत्तर प्रदेश शासन ने अचानक एक बड़ा कदम उठाते हुए आरोपियों के खिलाफ चल रहे आरोपों को वापस लेने के लिए कोर्ट में आवेदन दिया था। उत्तर प्रदेश शासन की ओर से अदालत से केस चार्जशीट में नामजद सभी 19 लोगों के खिलाफ आरोप वापस लेने की इजाजत मांगे जाने के कारण यह केस एकबार फिर सुर्खियों में आ गया था।
इस याचिका पर मंगलवार को सुनवाई हुई। अभियोजन पक्ष की दलीलें थी कि केस वापस लिया जाना चाहिए। हालांकि अदालत दलीलों से सहमत नहीं हुई। अदालत ने कहा कि अपील का कोई ठोस कानूनी आधार नहीं है। कोर्ट ने अर्जी को महत्वहीन मानते हुए इसे खारिज कर दिया।
मामले में अभियोजन की ओर से ओर से लगाई गई अर्जी के लिए मंगलवार की तारीख दी थी। अदालत ने दोनों पक्षों को सुना। साथ ही अदालत ने कहा कि मामले में अगली सुनवाई 6 जनवरी को होगी। साथ ही मामले में अदालत ने प्रतिदिन सुनवाई की बात कही है। इस दौरान अभियोजन को आगे गवाहों के बयान दर्ज करने के निर्देश दिए गए। साथ ही पुलिस आयुक्त और डीसीपी ग्रेटर नोएडा को निर्देशित किया कि अगर गवाहों को सुरक्षा की आवश्यकता है तो उन्हें सुरक्षा प्रदान की जाए।
अखलाक के परिवार के अधिवक्ता युसूफ सैफी और अंदलीब नकवी ने बताया अदालत ने अभियोजन पक्ष की ओर से लगाई गई याचिका को निरस्त कर दिया है। साथ ही सुनवाई के लिए 6 जनवरी का डेट दिया है। उन्होंने कहा कि हमें कोर्ट से न्याय मिला है, और हमें आशा है कि आगे भी हमें कोर्ट से न्याय मिलेगा। इस अवसर पर मौजूद भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी की नेता नेता श्रीमती वृंदा करात ने अदालत को धन्यवाद दिया तथा कहा कि यह न्यायालय का बहुत बड़ा कदम है। उन्होंने कहा कि कोर्ट का यह आदेश न्याय के पक्ष में है। उन्होंने कहा कि इससे पूरे देश में एक महत्वपूर्ण संदेश जाएगा। उन्होंने आरोप लगाया कि उत्तर प्रदेश सरकार ने एक पूरी साजिद के तहत केस को वापस लेने का प्रयास किया था।

