Noida News : सामूहिक दुष्कर्म के आरोपी चार को आजीवन कारावास, एक आरोपी को पांच वर्ष की सजा
Noida News : अपर सत्र न्यायाधीश/त्वरित न्यायालय द्वितीय प्रियंका सिंह की अदालत ने 19 वर्षीय युवती से सामूहिक दुष्कर्म, अप्राकृतिक यौनाचार और लूट के मामले में ने चार आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है।
न्यायालय ने ब्रजकिशोर उर्फ बिरजू, उमेश कुमार, पीताम्बर उर्फ पीतम और गुड्डू को दोषी करार दिया। इन चारों को धारा 376(डी) (सामूहिक दुष्कर्म) और 377 (अप्राकृतिक यौनाचार) के तहत आजीवन कारावास और प्रत्येक पर 50-50 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया है। जुर्माना अदा न करने पर उन्हें अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी। इसके अलावा, लूट के आरोप (धारा 394) में उन्हें दस वर्ष के कठोर कारावास और संपत्ति की बरामदगी के आरोप (धारा 411) में एक वर्ष के कठोर कारावास की सजा भी सुनाई गई है। मामले के एक आरोपी रवि कुमार को धारा-354 (छेड़छाड़) में चार वर्ष और धारा 376/511 (दुष्कर्म का प्रयास) में पांच वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई गई है। रवि पर कुल 10 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है।
एडीजीसी क्राइम शिल्पी भदौरिया ने बताया कि 14 नवंबर 2019 की शाम को पीड़िता को आरोपी रवि ने नौकरी दिलाने के बहाने बुलाया था। जब वह उसके पास पहुंची तो रवि ने उससे छेड़छाड़ की और दुष्कर्म का प्रयास किया। पीड़िता के शोर मचाने पर वहां दो अन्य युवक आ गए। जिन्होंने रवि को वहां से भगा दिया, लेकिन बाद में उन्होंने ही पीड़िता को एक सुनसान जगह पर ले जाकर उसके साथ दुष्कर्म किया। आरोपियों ने अपने अन्य साथियों को भी बुला लिया और कुल छह लोगों ने पीड़िता के साथ सामूहिक दुष्कर्म और अप्राकृतिक यौनाचार किया। घटना के दौरान उन्होंने पीड़िता के साथ मारपीट भी की और उसके आधार कार्ड, पैन कार्ड व नकदी लूट ली। पीड़िता को गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती कराया गया था। मामले में छह आरोपी थे। जिनमें से एक नाबालिग को किशोर आरोपी होने के कारण जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड भेज दिया गया था।
आरोपियों के पास से पीड़िता की चप्पल, पीड़िता के कपड़े, आधार कार्ड, पैन कार्ड, पर्स और नकदी बरामद हुई थी।
बचाव पक्ष के अधिवक्ता मनोज तेवतिया और आदेश खारी ने आरोपियों की युवा आयु, परिवार पर निर्भरता, प्रथम अपराध और विचारण में सहयोग का हवाला देते हुए न्यूनतम सजा की प्रार्थना की। मगर सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता (फौजदारी) शिल्पी मदौरिया ने इसे एक घिनौना और गंभीर सामाजिक अपराध बताते हुए अधिकतम दंड की मांग की थी। दोनों पक्षों को सुनने के बाद अदालत ने आरोपियों को दोषी करार दिया। सजा सुनाते समय न्यायालय ने कहा कि अपराध की गंभीरता और पीड़िता पर पड़े प्रभाव को देखते हुए दोषियों को अधिकतम सजा देना जरूरी है। न्यायालय ने यह भी आदेश दिया कि दोषियों से वसूला गया जुर्माना पीड़िता को प्रतिकर के रूप में दिया जाए। साथ ही पीड़िता को विधिक सेवा प्राधिकरण से अतिरिक्त मुआवजा दिलाने की भी संस्तुति की गई है।

